Important Things For A Happy Life | सुखी जीवन के लिये आवश्यक बातें

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Important Things For A Happy Life | सुखी जीवन के लिये आवश्यक बातें:

  • कोई भी नशा भगवत प्राप्ति के मार्ग में चलने वाले उपासक को नहीं करना चाहिए बैठा लो |आजकल यह भी बहुत सूक्ष्मता से साधन मार्ग में लोगो को गिराने के लिए प्रवेश कर गया है कि थोड़ी सी भांग खा लो बस भगवद आनंद में डूब जाओगे या 1 , 2 चिलम फूंक लो या मुकाम हुकम हम प्रणाम करते हैंI | सुखी जीवन के लिये आवश्यक बातें Important Things For A Happy Life.
  • जो ऐसा करते हैं सिद्ध महापुरुषों के उनको हम प्रणाम करते हैं पर अपने कच्चे साधकों के लिए या भगवत प्राप्ति के लक्ष्य वालों के लिए हमें कहीं शास्त्र में आज तक नहीं लिखा कहीं ऐसा नहीं मिला कुछ लोग उदाहरण देते हैं कि भगवान शंकर भी भांग खाते हैं
  • भगवान शंकर भांग खाते नहीं पीते हलाहल जहर पीते हैं जगत की रक्षा के लिए समुद्र मंथन में निकला हुआ हर शहर पिया तुम एक धतूरे का फल खाकर दिखाओ नीचे उतरने नहीं दिया है यही है
  • नीलकंठ तुम्हें भूत पानी आ रो के दिखाओ एक बूंद पानी चला जा खूब-खूब करते रहेंगे पूरा हलाल समुद्र मंथन का या रोक लिया है इसलिए नीलकंठ भगवान उनको कहा गया भानु जगत मंगल के लिए सब किए हैं वह कोई ऐसा नहीं कि थोड़ा भांग खाकर कैलाश भांग का नशा कितनी मिनट रहता है 24 घंटे बस और नही हो सकता

क्या क्या से काम नहीं करना चाहिए?|Important Things For A Happy Life:

  • कोई भी तामस वस्तु नशीली वस्तु अगर स्वीकार करेंगे तो शुद्ध भजन नहीं हो पाएगा इसलिए जो कर रहे हैं वह सिद्ध हम प्रणाम करते हैं हमारा निषेध करने का कोई बलि नहीं है ৷
  • शास्त्र कह रहा है शाम अस्वस्थ नशीली कोई भी नशा भी होना चाहिए साधक के जीवन में चांद से रखो परहेज गुरु की औलाद देवगन की शिवा जीवन में किसी और की ड्यूटी पानी चाहिए गुरुदेव आदेश दिया है ৷

भगवान की प्राप्ति कैसे होती है | How to Attain God:

  • चरण आराधना करने पर भगवान की प्राप्ति हो जाती पुंडरीक जी ने अपने माता-पिता की आराधना की भगवान विट्ठल उनको दर्शन देने बिना चाहे आ गए ऐसे उज्जवल जो हमारे गुरुजन हैं ৷
  • माता-पिता यदि हम उनका अपमान करेंगे उनको गाली देंगे तो हम जरा मरण पाएंगे सदगुरुदेव की सुख देने की भावना बुरे संघ का बुरे बेसन का कभी न रखो मन में मुकाम लोग को छोड़कर सब जीवो पर स्वाभाविक जो जैसे कर्म किए जीवन भर जैसे मन में रखे विचार अंतकाल फार्म अनुज का होगा उसके अनुसार बहुत सुंदर मेरे भाई महाराज ৷

वृद्धावस्था और मृत्यु से दुर्गति से अपने को बचा |Important Things For A Happy Life:

  • वृद्धावस्था और मृत्यु से दुर्गति से अपने को बचा लो बढ़िया समय जरा मरण बॉक्स आए हमारे ऊपर वृद्धावस्था का प्रभाव ना पड़े इस शरीर की वृद्धा अवस्था का प्रभाव हमारे ऊपर न पड़े इस शरीर की मृत्यु आस्था का प्रभाव हमारे ऊपर हम सीधे अभिमानी तो हमारे शरीर में हो जाता है ৷
  • हम स्वरूप स्वरूप की तरफ जो मनुष्य मेरा आश्रय लेकर के मेरी प्राप्ति के लिए बताए गए सिद्धांतों के अनुसार प्रेम करता है उसके उस प्रेम को देख कर के हम उसको स्थिति प्रदान कर देते हैं यशोदा मैया लाला जी को श्रमिक सो रही पर्वत प्रयत्न नहीं छोड़ गए प्रभु स्वयं अपने को बंधा दिया बस ऐसा ही करते ৷
  • जब पार्षद हार नहीं मानता हर कष्ट देता है किसी प्रलोभन में रुकता भी नहीं है प्रयत्नशील रहता भगवत प्राप्ति के लिए तो प्रभु उसके प्रयत्न को देखकर द्रवित हो जाते और अपने आप को प्रकाशित कर देते हैं अगर हम प्रमाद स्थिति में रहेंगे तो आसान होता रहेगा तो साधन अर्थात बाप बाप होता रहेगा तो भजन में प्रगति ही नहीं बाप रहित जीवनी भजन की योग्यता बहुत सावधान रहना चाहिए ৷

मेरे द्वारा बताए हुए सिद्धांतों | my principles | Important Things For A Happy Life:

  • कोई भी बहुत बड़ा इनका दंड मिलता है जीव जानते नहीं अज्ञान की धारा में मनमानी आचरण करते रहते हैं जो मेरा आश्रय लेकर के मेरे द्वारा बताए हुए सिद्धांतों का प्रभु जी संत रूप में गुरुदेव के रूप में शास्त्र के रूप में वृक्षों के रूप में हमें मार्ग बताते हैं हम प्रयास करें पूर्णता उनकी तरफ से हम शरणागति का प्रयास कर रहे हैं पूर्णता उनके हाथ उनकी प्राप्ति का प्रयास कर रहे हैं यह उनके हाथ की बात कब कैसे हमें मिलेंगे कौन सी स्थिति दें ৷
  • यह वृद्धावस्था और यह मरण अवस्था जीते जी मुक्ति प्राप्त करने के लिए मानव दे मिलाएं अगर आप प्रयासरत रहे जीवन में अनुभव आपको नहीं हुआ और कभी भगवद आश्रय छोड़कर आप इधर-उधर भटके नहीं तो आपका शरीर पूरा होते-होते भगवान हमको करा देंगे पीछे सब बढ़िया है ৷
  • स्वयं प्रभु ने उस समय मैं स्वयं आकर स्मृति रूप से उसके हृदय में जागृत हो जाता हूं क्योंकि जीवन भर लड़खड़ाते हुए ही सही पर हमारी तरफ चलने का प्रयास किया है हमने सुना है बाल्यावस्था से भगवान के मार्ग में लगे हैं ৷
  • उनको इस बात पर संतोष कर लेना चाहिए कि मरने के बाद भगवान मिलेंगे शरीर छूटने के पहले ही हमें छोड़कर वह स्थिति प्राप्त करनी है जो भागवत की स्थिति है बिल्कुल सच ऐसे लगता है ৷

अपने स्वरूप का अनुभव है | Experience Your Nature:

  • अपने स्वरूप का अनुभव अपने स्वरूप से ही होता है अपने से ही अपने काम होता है इसमें किसी अन्य का सहयोग नहीं साधना क्योंकि पवित्र हो जाएं पवित्र हो जाएंगे तो अपने स्वरूप मिले हो जाएंगे शांत हो जाएंगे जैसे शांत जल में ही हम देख सकते ऐसे संता करण में ही सारे भाव का प्रादुर्भाव होता है ৷
  • इसलिए भक्ति में भाव में सबसे पहले रखा गया शरीर की मृत्यु के पहले ही शरीर का नाश हो जो लोग भूले हुए हैं ना किए युवान अवस्था लोगों के लिए बड़े-बड़े शिक्षा देते हैं अरे तुम तो अभी तुम्हारी तो खेलने खाने की उम्र भजन क्यों भर तुम्हारी उनसे पूछो जो प्रदेश दे रखे तुम्हारी उम्र कौन सी है ৷
  • तुम कल तुम भगवत चिंतन में रखते हो उत्तर देने की शामत से नहीं इसलिए बोल नहीं पाते जब तक आप में पूर्वाभ्यास नहीं किया तो आप का भजन जीवन में आगे नहीं होने वाला यह भूल जाओ कि लड़का बच्चा परिवार उनके सब ब्यावर और सब होने के बाद बुढ़ापे में आराम से जाकर वृंदावन में फ्लैट लेंगे भजन करेंगे ৷
  • भूल जाओ रेट ले सकते हो आओगे लेकिन यहां पर पंछी करोगे भजन भी कर पाओगे सत्संग में बैठोगे सो जाओगे शब्द समझ में नहीं आएगा क्योंकि अपडेट करके अपनी बहू और लड़का बच्चा की बातें करोगे प्रीतम की बातें कभी नहीं कर पाओगे देख लेना जीवन में लेकिन मृत्यु अवस्था तो 1 सेकंड के बाद भी आ सकती है ৷
  • इसलिए हमारा यह जो वर्तमान समय चल रहा है यह भगवद आकार वृत्ति से युक्त होना चाहिए वृद्धावस्था के आने के पहले भगवत प्राप्ति कर ले यह बात तो समझ में आ जाती है 70 वर्ष 75 वर्ष रहते हैं आजकल तो सारे में राधेश्याम हो जाता है तो जवानी नहीं कौन है ৷

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