Delhi Declaration at G20: India Creates Consensus Amid Objections from China, US and Russia

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Delhi Decleration Adopted at G20:

नमस्कार दोस्तों दोस्तों भारतीय डिप्लोमेसी की एक बहुत बड़ी जीत हुई है इसमें कोई दो राय नहीं है क्योंकि मैं आपको बता दूं आज सुबह तक ऐसा लग रहा था कि G20 का एक ज्वाइंट डिक्लेरेशन यह शायद साइन नहीं हो पाएगा क्योंकि मैं आपको बता दूं कई ऐसे मुद्दे हैं जैसे क्लाइमेट क्राइसिस हो गया रूस यूक्रेन का वार हो गया इसको लेकर जो 20 देश है मतलब 19 कंट्रीज प्लस यूरोपीय यूनियन G20 के कंट्रीज है वह एक साथ सहमत नहीं हो पाए क्योंकि रूस चीन एक तरफ है बाकी के देश एक तरफ है।

 जिसकी वजह से ज्वाइंट डिक्लेरेशन होता है ना ज्वाइंट डिक्लेरेशन का मतलब सारे देश एक साथ मिलकर करें कि हां यह जो डॉक्यूमेंट डिक्लेयर किया गया है हम इसको मंजूरी देते हैं और साथ ही साथ में आपको यह भी बता दो 2008 से लेकर अभी तक जितने भी G20 के समित हुए हैं यह 18th G20 का सम्मिट पिछले जितने भी 17 सबमिट हुए हैं इन सभी में कभी भी ऐसा नहीं हुआ है।

कि ज्वाइंट डिक्लेरेशन साइन नहीं हुआ तो एक तरह से मन को ज्वाइंट डिक्लेरेशन साइन नहीं होतातो यह भारत का यह जो G20 का प्रेसीडेंसी है इसके ऊपर ढाबा सा लग जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ यहां पर जो डिप्लोमेसी है उसको करते हुए चाहे हमारे फाइनेंस मिनिस्टर हो गई या फिर हमारे फॉरेन मिनिस्टर हो गए हमारे शेरपा हो गए वह सब एक साथ आए।

 यहां पर फाइनली आप देख सकते हो G20 न्यू दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन यह फाइनली साइन हो गया तो इसके बारे में आपको एक-एक चीज बताऊंगा आपको समझ में आएगा कैसे चीज वर्क करती हैं कंटेंशन मुद्दे कौन से थे जिसको लेकर फाइनली भारत ने रिजॉल्व किया है लेकिन छोटी बात नहीं है आपको Article से आपको आगे पूरा पढ़ना होगा तब चीज समझ में आ पाएंगे।

Whats Happning in Bharth For G20?

चलिए शुरुआत करते हैं और सबसे पहले यह देखते हैं कि एक्जेक्टली हो क्या रहा था देखी जैसा मैंने आपको बोला G20 लीडर्स सबमिट जो स्टार्ट हुआ था उसमें जो सबसे बड़ा क्वेश्चन यही आ रहा था बार-बार की क्या यहां पर एक ज्वाइंट डिक्लेरेशन सभी देशों के साथ मिलकर यह साइन हो पाएगा कि नहीं हो पाएगा क्योंकि यहां पर डिफरेंस थे डायवर्जेंस थे कई मुद्दों को लेकर वह मैं आपको आगे बताऊंगा किन-किन चीजों को लेकर लेकिन अगर यह ऐसा नहीं होता।

तो पहली बार ऐसा होता कि कोई एक ज्वाइंट डिक्लेरेशन G20 के समिट में साइन नहीं हो पा रहा है और फाइनली ऐसा आप कह सकते हो कि भारतीय जो डिप्लोमेसी है उन्होंने इसे पार कराया क्योंकि आपने देखा होगा कि पूरे साल भर में कई सारे मीटिंग्स हुए थे आपने देखा ना कभी जयपुर में कभी दिल्ली में कभी और अरुणाचल प्रदेश में कश्मीर में कई सारे यहां पर मीटिंग हुए थे।

मैं आपको बता दूं किसी भी मीटिंग में यहां पर ज्वाइंट डिक्लेरेशन अभी तक साइन नहीं हो पाया था चाहे आप फॉरेन मिनिस्टर्स की मीटिंग की बात करें और यही एक ऐसा लग रहा था कि शायद जो लीडरशिप सबमिट है जो आज और चल चल रही हैइसमें भी यह नहीं हो पाएगा लेकिन पीएम मोदी ने आज दोपहर में आई थिंक लगभग 2:00 बजे के आसपास हो रहा था मैं सब कुछ ट्रैकिंग कर रहा था तभी यहां पर उन्होंने यह अनाउंस किया कि आई हैव रिसीवड गुड न्यूज़।

यह पीएम मोदी ने बोला ड्यू टू हार्ड वर्क ऑफ आर्ट टीम कंसेंसस हस बीन बिल्ट ओं न्यू दिल्ली G20 लीडरशिप समिट डिक्लेरेशन और इसीलिए उन्होंने कहा कि इट इस माय प्रपोज था दिस G20 डिक्लेरेशन भी अडॉप्टेड यह पीएम मोदी ने कहा और इसको अप्रूव कर दिया वहां पर जितने भी मेंबर्स थे लीडर्स द वर्ल्ड के बिडेन जितने भी थे उन सभी ने अपना सर हिलाया और कहा कि यश भी अप्रूव था और फाइनली यह अप्रूव हो गया और यह अडॉप्ट कर लिया गया है और साथ ही साथ में आपको एक इंटरेस्टिंग की बताता हूं कि।

पीएम मोदी ने स्पेशल धन्यवाद दिया शेर पास को लेकर मतलब हमारी जो मिनिस्टर्स हैं जो ऑफिशल्स हैं एस्पेशली जो शेर पर आपको पता होगा ना शर्मा मतलब होता है वह देश को रिप्रेजेंट करते हैं वह हर बार तो ऐसा नहीं हो पाएगा कि प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट बार-बार चीजों को लेकर बातचीत करें अलग-अलग देशों के साथ तो इसके लिए एक शेरपा पॉइंट किया जाता हैभारत की तरफ से जो शेरपा थे वह थे अमिताभ कांत और अमिताभ कांत आपको पता है वह पहले सीईओ भी रह चुके हैं आपके नीति आयोग के राइट तो उन्होंने भी यहां पर आप देखिए उनका एक बड़ा योगदान था।

Amitabh Kant Says that on Delhi Declaration in G20:

उन्होंने कहा हिस्टॉरिकल एंड पाठ ब्रेकिंग G20 डिक्लेरेशन विद 100% कंसेंसस मतलब उन्होंने कहा कि जितने भी पैराग्राफ लिखे गए हैं जो जो चीज़ लिखी गई है उसे पर हंड्रेड परसेंट कंसेंसस आया है किसी प्रकार का फुटनोट नहीं है कि रूस ने यह बात नहीं मानी चली चीन ने बात नहीं मानी उस ना रास्ता ऐसा कुछ भी नहीं हर किसी देश को भारत मनाने में कामयाब हो गया है अब क्वेश्चन यहां पर यह है।

वह कंटेंशन इश्यूज कौन से थे | Contentious Issues? Russia, Ukraine War:   

प्रॉब्लम्स क्या-क्या थी देखो सबसे बड़ा जो मुद्दा इस समय चल रहा है वह है रूस यूक्रेन वार को लेकर इन फैक्ट मैं आपको बताऊं जो G20 की फॉरेन मिनिस्टर की मीटिंग हुई थी न्यू दिल्ली में उसमें एस जयशंकर साहब ने खुद ही यह बात कही थी कि जो G20 के मेंबर कंट्रीज है उसमें बहुत ज्यादा डायवर्जेंस है डिफरेंस है उन्होंने कहा वेरी फ्रेंकली ठे वेयर कंसर्न्ड विद थे।

यूक्रेन कनफ्लिक्ट थेरे वेयर दिवेरजींस थेरे वास एन आउटकम डॉक्यूमेंट इंस्टेड ऑफ़ ए ज्वाइंट स्टेटमेंट मतलब की जो एक ज्वाइंट स्टेटमेंट आना चाहिए था उसके बजे जो फॉरेन मिनिस्टर्स की मीटिंग हुई थी उसमें एक आउटकम डॉक्यूमेंट लाया गया था और यह बड़ी चिंता की बात यहीं से लग रहा था कि क्या यहां पर भारत में जो यह जो सम्मिट होगा फाइनली जो आज और कल हो रहा है क्या इसमें पास हो पाएगा कि नहीं और क्योंकि एक और चीज आपको समझना है G20।

क्योंकि रूस यूक्रेन वार का जब मुद्दा आता है ना तो वेस्टर्न कंट्रीज यूरोपीयन कंट्रीज वह भारत से काफी नाराज से आपने देखा होगा क्यों क्योंकि भारत ने पूरी तरह से डायरेक्ट तरीके से कंडोम नहीं किया था रूस के इन्वेंशन को क्योंकि रूस भारत के बीच में काफी अच्छी खासी पार्टनरशिप है तो भारत एक तरह से बैलेंस बनाकर चल रहा था इन फैक्ट उस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल जो कोऑर्डिनेटर हैं G20.

जॉन किर्बी उन्होंने अभी जस्ट दो दिन पहले 7 सितंबर को यह कहा G20 सबमिट में जाने से पहले उन्होंने यह बात कही की ज्वाइंट डिक्लेरेशन रूस और वेस्ट के बीच में आना बहुत मुश्किल है क्योंकि यहां परउनका कहना था कि रूस हमारी बातों को शायद नहीं मानेगा और वह डिक्लेरेशन के ऊपर साइन नहीं करेगा फिर इसके अलावा यहां पर आप देख सकते हो दूसरी तरफ जो रूस के फॉरेन मिनिस्टर आपको पता है पुतिन नहीं आए हैं।

लेकिन जो रूस के फॉरेन मिनिस्टर है लेबरों उन्होंने भी यह बात कही उन्होंने यह कहा कि अगर मॉस्किटो के व्यूह को अगर नहीं रखा जाता है डिक्लेरेशन में तो हम भी इसको लेकर साइन नहीं करेंगे आई होप आप समझ पा रहे होंगे अब की कितना ज्यादा डिफिकल्ट हो जाता है डिप्लोमेसी में इन सारी चीजों को हैंडल करना एक तरफ रसिया है चीन है दूसरी तरफ वेस्टर्न कंट्रीज है उस है दोनों अपने बात पर अड़े हुए थे लेकिन कहीं ना कहीं भारत को इसको सुलझाने की जरूरत थी मैं आपको बताता हूं वह था।

क्लाइमेट क्राइसिस | Climate Crises:

अब क्लाइमेट क्राइसिस में यह था कि यहां पर जो क्लाइमेट से निपटने के लिए जो हमारा गोल होना चाहिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट की तरफ जो गोल होना चाहिए वह हमारा किस तरह का होगा क्या जब हम बात करते हैं फॉसिल फ्यूल को खत्म करने की तो क्या हम सिर्फ कोयले को भी हमें खत्म करना है या फिरया फिर फॉसिल फ्यूल को कंपलीटली हटा देना है और रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ता है इसको लेकर भी बहुत ज्यादा कंटेंशंस आपको देखने को मिलेगा।

क्योंकि G20 कंट्रीज यह वो देश है आपको पता होना चाहिए जो की 80% एमिशन दुनिया में जितना भी एमिशन होता है उसका 80% जिम्मेदारी इन्हीं G20 कंट्रीज के ऊपर है तो जरूरी है कि यह G20 कंट्री सहमत हो तभी यहां पर जो फॉसिल फ्यूल का यूजर्स है वह काम हो पाएगा और हम रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ जा पाएंगे और क्लाइमेट चेंज को रोक पाएंगे एक्चुअली क्या हुआ था इसके पहले जब जुलाई में मीटिंग हुई थी।

क्लाइमेट मिनिस्टर्स की एनर्जी एंड क्लाइमेट मिनिस्टर्स की तो वहां पर भी बहुत डिफरेंस था और एक ज्वाइंट डिक्लेरेशन साइन नहीं हो पाया था लेकिन यहां पर भी भारत कामयाब हुआ है वह मैं आपको आगे बताऊंगा क्लाइमेट चेंज को लेकर क्या एक बड़ा चीज किया गया एक फंड की बात करेगा वह मैं आपको आगे बताऊंगा चीन क्योंकि यहां पर आप देख सकते हो कल की ही बात है।

यूके के पीएम ऋषि सुनक उन्होंने यह बात कही इंटरव्यू मेंकि चीन ऑब्जेक्ट कर रहा है क्लाइमेट चेंज को लेकर मतलब क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड जो इश्यूज है उसमें यहां पर कहीं ना कहीं चीन ऑब्जेक्ट कर रहा है और यहां पर वह रोड ब्लॉक क्रिएट कर सकता है लेकिन बीजिंग की तरफ से भी बयान आ गया कल जो है कि हम भी चाहते हैं यहां पर कुछ पॉजिटिव आउटकम आए और फाइनली मैं वापस से यह कहूंगा कि भारत ने हर एक देश को साथ लेकर चला और एक डिक्लेरेशन साइन कराया। 

Why Is join Declaration Important | ज्वाइंट डिक्लेरेशन इतना इंपॉर्टेंट क्यों होता है:

मैं आपको बता दूं की ज्वाइंट डिक्लेरेशन इतना इंपॉर्टेंट क्यों होता है देखो कोई भी देश अगर इस तरह के बड़े समेत को रखता है तो एक उसूल जो प्रेक्टिस होती है वह होता है स्टैंडर्ड डिप्लोमेटिक प्रेक्टिस इसको हम कहते हैं की ज्वाइंट डिक्लेरेशन होना चाहिए तभी उसे देश की बड़ी जीत मानी जाती है कि यहां उसे देश ने इसको होस्ट किया यह सबमिट कंडक्ट कराया और एक कंसेंसस बनाने की कोशिश की तो भारत इसमें वर्ल्ड लीडर के तौर पर आगे आ सकता है।

क्योंकि बहुत से देश हो सकता है कि यह ज्वाइंट डिक्लेरेशन साइन नहीं कर पाते हो सकता है यह अगर सबमिट मान लो अगर उस के अंदर होता अगर मन को यह सबमिट ब्राजील में होता या फिर साउथ अफ्रीका में होता हो सकता हैवहां पर यह ज्वाइंट डिक्लेरेशन शायद साइन नहीं हो पाया था लेकिन कहीं ना कहीं जो करके दिखाया है उसकी वजह से हमारी जो छवि है वह काफी बेहतर होगी आप क्वेश्चन यह है। 

The New Delhi Leaders Declaration Is Broadly Focus On Five Key Areas | इस डिक्लेरेशन में क्या क्या है G20:

देखो होने को तो बहुत कुछ है मैं उसमें एक-एक डिटेल में नहीं जा सकता लेकिन पांच जो बड़े एरिया पर साइन हुआ है जो डिक्लेरेशन हुआ है वह कौन-कौन से हैं।

एक तो स्ट्रांग सस्टेनेबल बैलेंस एंड इंक्लूसिव ग्रोथ को लेकर गए हैं दूसरा है जो हमारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल आपको पता होगा जिसमें टोटल आई थिंक शायद कितने 17 गोल है ना 17 18 है कुछ तो यह जो गोल-से बेसिकली उसकी तरफ और ज्यादा तेजी से प्रोग्रेस करना।

फिर इसके अलावा ग्रीन डेवलपमेंट बैंक जी मैं इसी की बात कर रहा था यहां पर क्लाइमेट चेंज को लेकर एक बहुत बड़ा ग्रीन डेवलपमेंट पैक जो है वह साइन किया गया है।

फिर इसके साथ-साथ यहां पर मल्टीलेटरल इंस्टीट्यूशंस पर फोकस किया जाएगा 21st सेंचुरी में एक मल्टीलेटरल इंस्टीट्यूशन सोना चाहिए जो सभी के ऊपर फोकस करें अफ्रीका हो एशिया हो डेवलपिंग कंट्रीज हो उनको भी यहां पर शामिल किया जाए फिर इसके अलावा इन्वाइरेटिंग मल्टीलेटरलिज्म मतलब अगेन मल्टीलेटरलिज्म को लेकर ज्यादाबड़ी बातें कही गई है।

उन्होंने क्या बात कही है आईटी हस बीन द मोस्ट एंबिशियस इन द हिस्ट्री ऑफ़ G20 प्रेसिडेंसी की 112 लाइट आउटकम्स देखो मैं आपको बताता हूं पिछले जितने भी आपके G20 समिट हुए थे यह आप ध्यान से देखिए यहां पर आउटकम कितना हुआ था मतलब किन-किन चीजों को लेकर सहमति बनी थी आप देख सकते हो इंडोनेशिया में जो हुआ था अभी लास्ट टाइम पिछले साल यहां पर 27 चीजों को लेकर सहमति बनी थी आउटकम फिर डॉक्यूमेंट 23 डॉक्यूमेंट आपका ले गए थे।

फिर इटली में हुआ था कितना आप देख सकते हो मतलब पिछले वाले प्रेसिडेंसी में कभी 50 कभी 65 कभी 30 इतने ही डिक्लेरेशन आपकी सहमति बन पाई थी लेकिन आप देखिए भारत में कुछ अलग करके दिखाया है भारत के अंदर आप देखोगे तो टोटल 112 चीजों को लेकर सहमति बनी है जिसमें 73 आउटकम है जो की एक प्रॉपर डॉक्यूमेंट है एनएक्स डॉक्यूमेंट मतलब उसके साथ-साथ जो और डॉक्यूमेंट होते हैं वह 39 है तो टोटल 112 के आसपास देखने को मिलेगा जो की एकबहुत बड़ी बात है।

फिर इसके अलावा होंगे जाने की कोशिश कर रहे होंगे कि सर यूक्रेन को लेकर क्या बोला गया मतलब इस डॉक्यूमेंट में जो डिक्लेरेशन साइन हुआ है जिसमें रसिया भी बात मान गया है चीन भी बात मान गया है उस भी मान गया है जर्मनी भी मान गया है इन सारी चीजों में यहां पर।

 यूक्रेन को लेकर क्या कहा गया है G20:

देखो यूक्रेन को लेकर यहां पर जो शब्दों का इस्तेमाल किया गया उसको बहुत ध्यान से समझना है ठे हैव मेड ए कॉल हस बीन मेड फॉर इस्टैब्लिशमेंट ऑफ़ ए कंप्रिहेंसिव जट एंड लास्टिंग पीस इन यूक्रेन मतलब सबसे पहले तो यह बोला गया है हमें कोशिश करनी चाहिए कि यूक्रेन के अंदर एक पीस हम लेकर आए शांति लेकर आए यह बोला क्या है फिर इसके साथ-साथ इसमें यह भी बोला गया है कि जो मेंबर स्टेट्स है उनसे आगरा किया जाता है अर्क किया जाता है कि वह यहां पर।

किसी भी प्रकार का धमकी ना दें मतलब किसी भी देश कोटेरिटरी को लेकर धमकी ना दें कि हम यह फोर्स का इस्तेमाल करेंगे ऐसा करेंगे वैसा करेंगे ऐसा नहीं होना चाहिए और फाइनली यूक्रेन को लेकर एक और चीज बोला गया है वह यह है कि न्यूक्लियर वेपंस को लेकर कोई धमकी नहीं होनी चाहिए आपको याद होगा ना कि जब रूस यूक्रेन वर चल रहा था पिछले साल तो यहां पर रूस की तरफ से काफी बार कई बार धमकी ऐसे देखने को मिल रहा था कि हमारे पास न्यूक्लियर वेपंस है।

हम उसका शायद जरूरी नहीं है कि हम उसको अपने पास रखें तो एक प्रकार से धमकी के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन कहीं ना कहीं भारत ने इसको भी डलवा दिया यहां पर ताकि एक तरफ वेस्टर्न कंट्रीज भी खुश हो जाए और दूसरी तरफ रूस को भी ऐसा ना लगे कि कोई बहुत ज्यादा उसके खिलाफ बोला गया है तो यहां पर न्यूक्लियर वेपंस का भी शब्द है उसके अंदर जोड़ा गया है कि इसका धमकी यूक्रेन वार के दौरान नहीं होना चाहिए बिल्कुल भी ठीक है G20.

तो यह कई चीजे इससे रिलेटेड और भी अगर कुछ कुछ इंपॉर्टेंट जो टॉपिक है जो डिक्लेरेशन में साइन हुए हैं वह मैं आपके लिए लाता रहूंगा बट आई हो किस आपको काफी कुछ जाने को मिला होगा जाने से पहले एक इंटरेस्टिंग क्वेश्चन क्या बता सकते हो G20 समिट का पहला जो कंट्री है वह कौन सा था।

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