175 साल पुराने सिख रेजीमेंट का इतिहास | History of 175 years old Sikh Regiment

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याह रेजीमेंट है सिख रेजीमेंट भारत की इकलौती रेजीमेंट जैसी 26 जनवरी और 15 अगस्त डोनों की परेड में सलामी देने का मौका मिलता है जैसे छह सेलिंग होगी बहादुरी को देखकरअंग्रेजी हुकूमत ने बनाया था जैसे आज भी अंग्रेजों को बहुत इज्जत देते हैं इसलिए देश की सबसे बहादुर रेजिमेंट के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं और यह भी चीन क्यों डरता हैऔर ये क्या चिन क्यों चिन रेजिमेंट से बहुत साफ खाता है इन्हें सब को समझने के लिए बने रहिएगा हमारे साथ पेज पर। किया सबसे पहले अगर इनके इतिहास की बात करें तो सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट की स्थापना साल 1941 में हुई थी लेकिन इनका इतिहास बहुत पुराना है उसका उपयोग समय इस रेजिमेंट को सिख भुगतानियों के रूप में जाना जाता था और सिख पायनियास सिख रेजिमेंट बनने की कहानी भी काफी थी दिल चैस्प है 175 साल पुराने सिख रेजीमेंट का इतिहास ৷

रेजिमेंट क्या है | What is Sikh Light Regiment?

आज की सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट सिख पायनियरों को अपना पूर्व मानती है और पूरे 65 साल 1857 में किया था साल 1857 में सिख पायनियरों की 23 या 32वीं बटालियन बनी इसके खराब 1887 में इसके खराब 1887 में उसकी तीसरी बटालियन का गठबंधन हुआ 1857 से 1932 तक भूत लगै लड़ी जिसके बाद 1932 में भांग कर दिया गया ৷

इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों को ज्यादा सेनाओं की जरूरत पड़ी तब सिख पन्यार्श उसके जवानों के साथ साल 1941 में सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट का गठबंधन हुआ सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट का रेजिमेंटल सेंटर उत्तर प्रदेश के देश के फतेहगढ़ में है और यहीं युवाओं को योद्धा बनाना की कला सिखाई जाति है सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट का 19 रेगुलर बटालियन से और 3 टेरिटोरियल आर्मी 3 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन है सिख रेजिमेंट में सभी को सिख रेजिमेंट में ही ट्रेनिंग दिया जाता है जबकी बाकी रेजिमेंट को नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी ट्रेनिंग देती है। सिख रेजिमेंट में बहुत लड़ै लड़ कर अपना लोहा मनवा है पहले या दूसरे विष युद्ध में सिख रेजिमेंट में ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध में हिसा लिया था 175 साल पुराने सिख रेजीमेंट का इतिहास

कारगिल का युद्ध में सिख रेजिमेंट सहयोग | Sikh Regiment Cooperation in Kargil War:

1999 में कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की सेना को हराकार टाइगर हिल पर कब्ज़ा कर लिया गया इतना ही नहीं टाइगर हिल पर दुश्मनों की लगाई गई आग को आठवीं सिख बटालियन के तीन बहादुर सिपाही सुखविंदर सिंह रसविंदर सिंह और जसविंदर सिंह ने दुश्मनों के बीच जाकर बुझाया था जब पाकिस्तान की सेना ने पहाड़ी कब्ज़ा कर लिया था और उसकी मदद से नेशनल हाईवे को बर्बाद करना चाहा था तब जिस पर वापस कब्ज़ा करके इस रेजिमेंट ने कारगिल की जंग में बहुत बड़ा रोल निभाया था दोस्तो इशी वज़ह से

सिख रेजिमेंट को उसकी बहादुरी के लिए:

2 अशोक चक्र
14 महावीर चक्र
2 परमवीर चक्र
14 कीर्ति चक्र
15 सूरी चक्र
35 सेना पदक
64 वीर चाकर
35 विशिष्ट सेना पदक

चीन और सिख रेजिमेंट का इतिहास:

इस छड़प में 24 साल की सिपाही कुरपित सिंह समय 4 सिख सैनिकों ने भी बहादुरी से चीन का सामना किया, क्या मैं एक्सपोर्ट कर सकती हूं मने तो सिख सैनिकों के लिए गवन घाटी में चीनी सैनिकों को भगाना पड़ गया था

चीन आज भी भारतीय सैनिकों से डरता है या इस डर का करना 1 सदी पुरानी है सुसुल यानी चीनी सिमा के पास भारी उसके में भारतीय सेना के मुख्यालय के जाल में आज भी एक लाफिंग बुद्धा की एक सोने की मूर्ति राखी हुई है इस मूर्ति बात हम इस तरह कर रहे हैं क्योंकि कहते हैं कि इस मूर्ति को एक सदी पहले सिख रेजिमेंट के जवानों ने नहीं बुलाया था 9 बार सिख रेजिमेंट ने साबित किया कि वे अपने महान दर्जे के लायक

सिख रेजिमेंट की बहादुरी:

इस तरह चीन में अपने प्रभाव को मजबूत करने के लिए ब्रिटिश सेना ने समय शिखर पंजाब रेजिमेंट की मदद ली, बाकी रेजिमेंट के साथ ली थी सेन बिजिंग दाखिल ह्यू इस बेड बॉक्सर के लड़ाकू ने विदेशी जवानों को धमकाया अनलोगो में कम से कम 400 विदेशियों को बांधक बनाकर बिजिंग मौजूद विदेशी लागेसियां क्वाटर में रखा 55 दिनों तक चली इस लड़ाई के लिए 20000 जवान दखिल हुए थे जिस्म से करीब 8000 जवान ब्रिटिश सेना के साथ भारत से गए थे

इनमें से ज्यादातार सिख या पंजाब रेजिमेंट के ही थे कहते हैं कि जीत के बाद ब्रिटिश सेना लूट पथ में लग गई फ्रांस रूस के जावानों ने वहां पर नागरिको की हत्या कर दी, वहां के कुछ लोगो के महिलाओ को बलत्कार भी कर दिया मगर सिख सैनिक अपने मिशन पर अपने जी जान से लगे रहे या मिशन खत्म कर के वहां से लौटे हमें लाफिंग बुद्धा की मूर्ति अपने साथ ले कर आये इसी के साथ चिन

सिख सैनिकों के लिए अलग ही ख्वाब देखने को मिलता है यहीं प्रति सिख रेजिमेंट से जुड़ी एक और खास बात अगर आपको सिख रेजिमेंट के बारे में बताएं 15 अगस्त और 26 जनवरी की परेड के दौरान दो बार सलाम करती है जबकी बाकी सभी राज्य में एक बार गुरुद्वारे शीशगंज साहिब से होकर गुजराता है और वहां सिख रेजिमेंट या वहां सीखो के नववे गुरु तेग बहादुर वीरता को याद करती है और उनके सम्मान में अपनी तलवार को आला करके उन्हें सलाम करती है सलवार को आला करके सलाम करती है गुरुद्वारा कमेटी को भी पूरी तरह से बरसात देती है करती है शीशगंज साहिब गुरुद्वारा जहां बनाएं वहां पर गुरु तेज बहादुर जी का सिर आकर गिरा था जिसे औरंगजेब ने इस्लाम कबूल न किया पर गुरु जी का सिर कटवा दिया था सिख रेजिमेंट से क्यों थर-थर कांपता है चीन?

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