कश्मीर के इतिहास का असली सच :भारत-पाक विभाजन 1947 से लेकर संघर्ष तक की यात्रा | The Real Truth of the History of Kashmir

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The Real Truth of the History of Kashmir | कश्मीर के इतिहास का असली सच :भारत-पाक विभाजन से लेकर संघर्ष तक की यात्रा:

पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित कश्मीर का इतिहास उसके पर्याप्त सौंदर्य और प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ही उसकी रोमांचक और संघर्षपूर्ण कहानी से भरपूर है। कश्मीर का इतिहास न केवल उसके समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का परिचय देता है, बल्कि उसके साम्राज्य, राजा-महाराजा, और विभाजन के पीछे छिपी गहरी कहानियों की भी जानकारी प्रदान करता है।

कश्मीर का इतिहास अपने आप में एक रोमांचक यात्रा है, जिसमें विभाजन, समझौते, संघर्ष, और युद्धों के बीच बदलते समय के साथ इसके भूगोल, सांस्कृतिक विविधता, और राजनीतिक मानसिकता के परिप्रेक्ष्य में अद्वितीयता है। यहाँ तक कि कश्मीर का इतिहास हमें उसके पासवर्ड स्थलों, श्रद्धालु तीर्थस्थलों, और प्राचीन मंदिरों के संग्रह के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है।

इस लेख के माध्यम से, हम इस अनूठे इतिहास की यात्रा पर निकलेंगे, जहां हम जानेंगे कि कैसे कश्मीर ने भारत-पाक विभाजन से लेकर संघर्ष तक की यात्रा पर कदम बढ़ाए, उसके प्रथम राजा से लेकर आज के समय तक के राजाओं तक का सफर देखेंगे। इस सफर में हम उन घटनाओं, निर्णयों, और व्यक्तियों के साथ चलेंगे जिन्होंने कश्मीर के इतिहास को रंग दिया और उसकी जीवनी को महत्वपूर्ण बनाया।

कश्मीर का असली सच (The Real Truth of Kashmir):

1 कश्मीर का असली सच भारत आज कई बिखरे हुए किंग्डम्स नहीं एक देश कुछ लोग इस बात का क्रेडिट ब्रिटिश को देता है जो सरासर झूठ है ब्रिटिश भारत से निकलते- निकलते भारत को 2 ऑप्शन दिए थे 1 भारत का हिस्सा बानो 2 पाकिस्तान का हिस्सा बानो यार खुद को independent रखो|

जो लोग ब्रिटिश को मानते है की भारत को ओ लोग बनाए है तो ये सरासर गलत है भारत जो बनाने बनाने के लिए सरदार वल्लहभाई पटेल और VP Menon की देन है ।

जिन्होने खुद जाकर सब लोगो से मिल कर मनाया भारत को हिस्स बनने के लिए । Integration of the india ये किताब VP Menon के द्वारा लिखी गई है । जहां आप जम्मू कश्मीर की इतिहास गहराई से पढ़ सकते है। ओ कहते की 14th शताबादी में बुद्धिस्ट और हिंदू की राज था यहा पर और फिर अकबर में जम्मू कश्मीर को आपने मुगल साम्राज्य में मिला कर मुगल साम्राज्य का हिस्सा बना लिया ।

मुगल साम्राज्य के बाद 17 शताबादी डोगरा कमिटी आ गया और यह को अपने अधीन कर लेती है उसके बाद सिख साम्राज्य में अपना में अधीन कर के राज करने लगा उसके बाद 1846 में पहला एंग्लो सिख युद्ध के बाद सिख महराजा को युद्ध क्षतिपूर्ति के लिए 1 करोड़ का बयान लगा दिया साथ ही साथ एक पंजाब का हिस्सा सरेंडर करने को बोला ऐसे ही जम्मू कश्मीर एक टूटा फूटा राज बना

तब वहां के राजा गुलाब सिंह और ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच के संधि साइन हुआ जिसे हम “TREATY OF AMRTISAR” कहते है।
राजा गुलाब सिंह ने सिख की सेना को साथ ना देकर ब्रिटिश को साथ दिए थे तो इस बाद ब्रिटिश ने पूरा क्षेत्र का भार राजा गुलाब सिंह को दे दिया 1925 तक तेजी से आगे बढ़ें ।

राजा हरि सिंह राजा बने जो विभाजन के समय भी राजा थे | Raja Hari Singh became the king who was also the king at the time of partition:

अब आते है विभाजन के मुदा पर जब विभाजन हो रहा था तब भी राजा हरि सिंह ही थे पर उस समय जम्मू कश्मीर कुछ अलग अलग दिखता था जैसा कि हम पहले ही बता दिए है राजा के पास 3 बिकल्प था की ओ|
1 पाकिस्तान का हिस्सा बानो
2 भारत का हिस्सा बानो
3 स्वतंत्र रहे

हरि सिंह ने तीसरा विकल्प चुनें पर ये विकलप प्रिटिकल नही था माउंट बेटन हरि सिंह को जानते थे और उन्होंने कहा कि अगर आप स्वतंत्र रहते है तो आपका स्थिति ब्रिटिश सरकार शविकार नही करेगी । 15 august के पहले आप भारत या पाकिस्तान दोनो में से कोई एक चुनो । आप जो भी निर्णय लोग , ब्रिटिश सरकार उसे ही स्वीकार करेगी|

ये बिंदु महत्वपूर्ण है । क्योंकि इस चेतावनी के बाद भी राजा हरि सिंह ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया अब बातचीत शुरू हो गई थी, रियासतें और समय चाहती थीं, उन्होंने भारत और पाकिस्तान के साथ अस्थायी समझौते के लिए और समय मांगा, एक अस्थायी समझौता हुआ जिसका नाम standstill agreement से जाना जाता है । ये एक बफ़र समझौता था असली समझौता था “परिग्रहण का साधन”|

पाकिस्तान ठहराव समझौता साइन किया पर भारत नही हा हा हा आप तो सोच रहे है की पाकिस्तान कश्मीर का दोस्त बन गया लेकिन ये दोस्ती भी अजीब दोस्ती थी पाकिस्तान ने हरि सिंह पर एक अलग ही दबाओ बनाया पाकिस्तान में कश्मीर का भोजन जाने भेजना ही बंद कर दिया और उसी समय पर्टोलियम भी बंद कर दिया उसके बाद रेलवे सेवा शुरू किया सच बात ये है की|

जैसे राजा हरि सिंह भी समय ले रहे थे उसी तरह पाकिस्तान भी समय ले रहा था कश्मीर पर हमला करने के लिए 27th October 1947 को पाकिस्तान में कश्मीर पर हमला कर दिया हरि सिंह खुद अपना राज को रक्षा करना नही कर पाए और उन्होंने भर से मदद मांगी और और भारत मदद करने के लिए राजी जो गया बशर्ते हरि सिंह “विलय पत्र” पर हस्ताक्षर करें के लिए मान गए और उन पर साइन किए लेकिन इसमें भी एक और स्थिति जोड़ा गया की जैसे ही नियम और कानून जोड़ते ही एक जनमत संग्रह का अर्थ है|

जहां लोग मतदान करते हैं की उनका भविष्य क्या होना चाहिए क्या उन्हे भारत का हिस्सा बनना है या नही ।
पाकिस्तान इस समझौता को मानता ही नही है बोलता है की ये दबाओ में आ कर ये साइन हुआ है एक ऐसा भ्रम जिस ने आने वाले 75 साल के लिए पाकिस्तान और भारत दोनो का जीना खराब कर दिया|

India vs Pakistan conflict over Kashmir | कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद:

भारत पाकिस्तान के बीच जंग चल रही थी सिर्फ युद्ध सामने से नही बल्कि बातचीत में भी जवाहर लाल नेहरु पाकिस्तान के प्रधान मंत्री लियाकत अली खान और माउंट बेटन दोपहर से आधी आधी रात तक बातचीत करते रहते थे लेकिन निस्कर्ष तक नही पहुंच पाते थे ये सिलसिला चलते चलते 1947 पूरा साल खत्म हो गया । अंतिम में भारत सरकार ने पकिस्तान सरकार को तीन परिस्थि रखे|

1 पाकिस्तान , कश्मीर पर जो भी लोग हमला किए है उनको पाकिस्तान सरकार उसको मदद करना बंद करे|
2 उन्हे कश्मीर राज्य पर राज करने न दे|
3 और हाथिर के साथ साथ हर प्रकार का सहायता देना बंद करे|

लेकिन पाकिस्तान का जवाब आया ही नहीं क्योंकि अगर कोई भी जवाब तो उसका अप्रत्यक्ष मतलब ये होता की पाकिस्तान उसके साथ है । और ओ तो यही दिखाना चाहते थे की कशीमीर लोग खुद भारत के खिलाफ एक आंदोलन चला रहे है। अब आता है ओ पल जब भारत बहुत बड़ा गलती करता है|

भारत ने अपनी मिल्ट्री पर नही लॉर्ड माउंटबेटन पर विश्वास करता है और भारत united nations गाई हमारे पास सबूत के तौर पर “instrument of accession” था हमे united nations को शामिल करने के जरूरत नहीं थी क्यू की कश्मीर भारत की एक अंतरिक मामला था । आज नही तो कल हमरी सेना कश्मीर जीत ही लेगी United Nations commission for India and Pakistan (UNCIP) बना|

यूनाइटेड नेशन (united nations) ने न भी भारत की बात मानी और न ही पाकिस्तान की बात मानी उन्होंने पाकिस्तान का बटवारा कर दिया एक ceasefire line जो आज भी भारत की lOC से मिलती है|

सर्त ये रखी की भारत और पकिस्तान दोनो की सेना पीछे हट जायेंगी और फिर बटवारा होगा और फिर कश्मीरी जनता वोट करेगी की उन्हें किस के साथ रहना है|
इस में एक बात बहुत महत्पूर्ण है कि पाकिस्तान हमेसा बोलता है कि पूरी तरह से नियम और कानून स्थापित होने के बाद ही एक बार फिर से स्वतंत्र बटवारा हो सकता है और जब से सारे कश्मीर में अच्छा तरह से संती होने के बाद ही पर ये कभी हो ही नही सकता है|

1st January 1949 में एक बार भारत ने अपना सेना प्रवाओ काम किया जरूर पर पाकिस्तान ने अपनी सेना का नियंत्रण काम नहीं किया|
इसके परिणा स्वरूप 1/3 जम्मू कश्मीर और लद्दाख का हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में है इसमें गिलगिट – बालटिस्त और आजाद कश्मीर ये दोनो क्षेत्र अभी भी सामिल है united nations और अंतरराष्ट्री समिति ये न ही भारत वास्तविक मानचित्र और न ही पाकिस्तान का वास्तविक मानचित्र मानती है क्यू भी पाकिस्तान का ताज मानचित्र में पूरा कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्रफल लगा लगा लिया है । लेकिन हम सब जानते है की ये सच नहीं है।

Conclusion:

असली तो सच और भी गहरा है और बहुत सारे लोग है कि हम ने इसमे बताया ही नहीं|
पाकिस्तान के लोग कहते है की उनको पाकिस्तान में उन्हें हक मिलते ही नही है और भारत का हिस्सा बनना ही है । भारत के लिए एक ये कूटनीतिक जीत है जैसे की अपने बहुत बार सुना होगा कि पाकिस्तान एक ही लिखित पर बना है बना है की हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही देश में एक साथ नहीं रह सकते है। इसे दो राष्ट्र कहता है कि इसी आधार पर जिन्ना ने हर उस क्षेत्र पर नियंत्रण करना चाहा जहा का मुस्लिम की जनसंख्या ज्यादा हो लेकिन यही तरीका बार बार प्रयोग करने से फेल होते दिखी|

FAQ on कश्मीर के इतिहास का असली सच:

कश्मीर में विभाजन कैसे हुआ?

भारत-पाक विभाजन के समय, महाराजा हरी सिंह ने कश्मीर को भारत से संघर्ष में रहने का निर्णय लिया।

कश्मीर मसले के पीछे क्या कारण थे?

कश्मीर मसला धर्म, सामर्थ्य, और जाति के पारंपरिक मुद्दों के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सीमा संबंधों से जुड़ा हुआ है।

कश्मीर मसले का निष्कर्ष क्या था?

भारत-पाक युद्ध के बाद, कश्मीर में एक विशेष स्थान बनाया गया जिसमें संघर्षों को नियंत्रित करने के लिए विचारात्मक समझौते का सहायता किया गया।

कश्मीर मसले का परिणाम क्या था?

विभाजन के परिणामस्वरूप, कश्मीर दक्षिणी भाग पाकिस्तान के अधीन आया और उत्तरी भाग भारतीय नियंत्रण में रहा।

क्या विश्व समुदाय कश्मीर मसले में शामिल था?

हां, संयुक्त राष्ट्र ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता बनाने में मध्यस्थता की और कश्मीर के मसले को सुलझाने का प्रयास किया।

क्या आज भी कश्मीर मसला असमाधानित है?

हां, कश्मीर मसला आज भी विवाद और असमाधान का कारण बना हुआ है और इस पर समाधान की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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